उत्तराखंडक्राइमदेश-विदेशदेहरादून

नीट यूजी एबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट मामले में हुई पहली गिरफ्तारी

तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर 20 लाख रुपए दिए थे। 12 आरोपी अभी भी संदिग्ध हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 45 लाख में हुआ था सौदा
एसआईटी ने मुख्य सरगान समेत दो को किया गिरफ्तार
आरोपी अरविंद कुमार ने खुलासा किया, बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे
अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज

देहरादून। नीट यूजी में फर्जी सर्टिफिकेट मामले में जांच कर रही एसआईटी टीम ने पहली दो गिरफ्तारी कर ली हैं। मंगलवार को 10 सदस्यीय एसआईटी टीम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले आरोपियों की जांच के लिए हरिद्वार पहुंची थी। उधर दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद वहीं दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में देहरादून एसएसपी और एसआईटी टीम ने देहारादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एबीबीएस सर्टिफिकेट फ्रॉड में पहली गिरफ्तारियों का खुलासा किया है। अब तक गिरोह के सरगना रूपेश पंडित ओर अरविंद कुमार को अरेस्ट किया गया है। एसआईटी ने खुलासा किया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 45 लाख रुपए में सौदा हुआ था। तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर 20 लाख रुपए दिए थे। 12 आरोपी अभी भी संदिग्ध हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
एसआईटी के अनुसार आरोपी अरविंद कुमार ने खुलासा किया कि उसने अपनी बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था।

क्या है उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट फर्जीवाड़ा
उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जीवाड़ा नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने और उनके जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने का मामला है। ऐसा आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाकर राज्य कोटे की आरक्षित एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश हासिल किया। जांच में सामने आया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके कई अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता व आश्रित बताकर कोटे का लाभ ले लिया। दिलचस्प बात ये है कि असली परिवार ने ऐसे किसी लाभ का दावा ही नहीं किया था। यहां तक कि फर्जी प्रमाण पत्रों पर एआई-जनरेटेड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया।

स्वास्थ्य मंत्री को सौंपे गए हैं 350 से अधिक डोमिसाइल
इसके बाद व्हिसलब्लोअर और पत्रकारों द्वारा स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेजों में 350 से अधिक डोमिसाइल यानी निवास और अन्य आरक्षित श्रेणियों जिनमें एससी, एसटी, ओबीसी व ईडब्ल्यूएस आदि के प्रमाण पत्र भी संदिग्ध बताए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस प्रशासन ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी, एसडीएम और पटवारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही है। संदिग्ध प्रमाण पत्रों को निरस्त करने और संलिप्त लोगों पर मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button