उत्तराखंडदेहरादून

वर्ष 2026 में बदरीनाथ-केदारनाथ क्षेत्र वनाग्नि का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना

अकेले बदरीनाथ डिवीजन में हुई जंगलों में आग की 68 घटनाएं

वर्ष 2026 में बदरीनाथ-केदारनाथ क्षेत्र वनाग्नि का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना
अकेले बदरीनाथ डिवीजन में हुई जंगलों में आग की 68 घटनाएं
केदारनाथ वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में आग की 21 घटनाएं दर्ज हुई
आग लगने की घटनाओं का सीधा संबंध मानवीय गतिविधियां बढ़ने से भी होता है
देहरादून। उत्तराखंड में इस साल फायर सीजन के दौरान बदरीनाथ-केदारनाथ क्षेत्र वनाग्नि का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। पिछले करीब ढाई महीने में राज्यभर में 276 जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आईं हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले बदरी-केदार क्षेत्र से जुड़े हैं। यह वही इलाका है, जहां चारधाम यात्रा के चलते लाखों श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं। ऐसे में बढ़ती मानवीय गतिविधियों को भी आग की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
पिछले सालों के मुकाबले इस साल उत्तराखंड के जंगल वनाग्नि के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित नजर आ रहे हैं। यह बात उन आंकड़ों को देखकर समझी जा सकती है, जो वन विभाग ने खुद जारी किए हैं। इसके बावजूद भी महकमे के ये रिकॉर्ड एक नई चिंता को पैदा कर रहे हैं।
दरअसल ये चिंता पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों को लेकर है, जिसे वनाग्नि के मामलों के लिए काफी अहम माना जाता है। उत्तराखंड वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में फॉरेस्ट फायर सीजन से लेकर अब तक वनाग्नि की कुल 276 घटनाएं हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले गढ़वाल क्षेत्र से है, यहां कुल 207 वन क्षेत्रों में आग लगने की जानकारी सामने आई है।
उधर कुमाऊं क्षेत्र में वनाग्नि के मामलों की संख्या 47 रही है, जबकि वाइल्ड लाइफ क्षेत्रों में कुल 22 आग लगने के मामले सामने आए हैं। चिंता की बात यह है कि इन मामलों में सबसे ज्यादा या बड़ा आंकड़ा बदरीनाथ डिवीजन का है। यही नहीं रुद्रप्रयाग डिविजन के अलावा गढ़वाल में केदारनाथ वाइल्डलाइफ सैंचुरी भी इस मामले में आगे दिखाई दे रही है। इनके आंकड़ों पर गौर करें तो 276 घटनाओं में से अकेले 68 मामले बदरीनाथ डिवीजन के है।
इसके अलावा रुद्रप्रयाग डिवीजन में 32 आग लगने की घटनाएं हुई है, जबकि केदारनाथ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी (अभयारण्य) में 21 घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। प्रभावित क्षेत्र के रिकॉर्ड पर नजर दौड़एं तो बदरीनाथ डिवीजन में 23।99 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसी तरह रुद्रप्रयाग डिवीजन में 22।82 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है। उधर केदारनाथ वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में 10.2 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान हुआ है। गढ़वाल क्षेत्र में टॉप 3 वनाग्नि के मामले इन्हीं इलाकों से सामने आए हैं।
खास बात यह है कि पूरे प्रदेश भर के रिकॉर्ड को भी देख लें तो इसमें पिथौरागढ़ डिवीजन को छोड़कर केवल चमोली और रुद्रप्रयाग जिले ही हैं, जहां सबसे ज्यादा जंगलों को आग लगने से नुकसान हुआ है। जाहिर है कि इन क्षेत्रों में वनाग्नि की वजहों को भी जानने की कोशिश हो रही है। ऐसे में सभी का सबसे पहले ध्यान चारधाम यात्रा पर ही जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 19 अप्रैल से उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और इस दौरान इस यात्रा में लाखों लोग इन जिलों में पहुंच चुके हैं।
सबसे ज्यादा मानवीय गतिविधियां केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में बढ़ी हैं। केदारनाथ धाम में अब तक 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। इसी तरह चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम में भी 1.60 लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर चुके हैं। जाहिर है कि इतनी बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण यात्रा मार्ग पर माननीय गतिविधियां काफी ज्यादा बढ़ गई हैं और इन्हीं इलाकों में वनाग्नि के मामले बढ़ने से इन घटनाओं को यात्रा से जोड़कर देखा जाने लगा है।
हालांकि वन विभाग फिलहाल तो चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं को जंगलों की आग का कारण सीधे तौर पर नहीं मान रहे हैं। लेकिन वन विभाग यह भी स्पष्ट करता है कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं का सीधा संबंध मानवीय गतिविधियां बढ़ने से भी होता है।
वन विभाग मानता है कि इन घटनाओं के पीछे की स्थिति को जानने के लिए अध्ययन की जरूरत है, जहां तक सवाल वन विभाग का है तो महकमे की तरफ से लगातार स्थानीय संगठनों और वन पंचायत के अलावा दूसरे विभागों से भी सहयोग लिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पर्यटकों और श्रद्धालुओं से भी लगातार अपील करते हुए इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा जा रहा है। इसके अलावा विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। फायर वॉचर्स की तैनाती, कंट्रोल रूम की सक्रियता और त्वरित प्रतिक्रिया दलों के जरिए आग पर काबू पाने की कोशिशें तेज की गई हैं। ड्रोन और सैटेलाइट मॉनिटरिंग जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है, ताकि समय रहते आग की घटनाओं का पता लगाया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button