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दूसरे के अधिकार क्षेत्र में काम करने के माहिर पेयजल निगम अभियन्ता संजय सिंह

मुख्य अभियन्ता पद पौड़ी में तैनात होने के बावजूद चहेते ठेकेदार को दून में दिया 4 करोड़ का लाभ

पौड़ी में तैनाती रूड़की में ठेकेदार को किया 69 लाख का भुगतान
देहरादून। उत्तराखण्ड पेयजल मुख्यालय में तैनात मुख्य अभियन्ता संजय सिंह का विवादों से लम्बा नाता रहा है। वह किसी ने किसी अवैध काम को लेकर चर्चाओं में रहते है। मंगलवार को भी उत्तरांचल प्रेस क्लब में हुई पत्रकार वार्ता में भी उनके दो कारनामों का खुलासा हुआ है। उन्होंने अमृत योजना में रूड़की से स्थानान्तारण के बाद अपने चहते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए अधीक्षण अभियन्ता पौड़ी में तैनात होते हुए 70 लाख का भुगतान कर दिया। वहीं दूसरी ओर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए मोथरोवाला से आराघर तक बिछाई गई सीविर लाइन में ठेकेदार की ओर से सरकार व विभाग को दी जाने वाली प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी व एडिशनल प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी लगभग 7.49 करोड़ से घटाकर 2.81 करोड़ कर दी। जिसका अधिकार अधीक्षण अभियन्ता को होता है लेकिन संजय सिंह ने मुख्य अभियन्ता पौड़ी गढवाल रहते हुए इस कारनामें को अंजाम दिया।
एडवोकेट शाहिद रजा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि मामला रुड़की के प्रोजेक्ट इंप्लीमेन्टशन यूनिट, अमृत योजना का है। जहां संजय सिंह अधिशासी अभियन्ता के पद पर तैनात थे और उनका प्रमोशन अधीक्षण अभियन्ता पद पर होने के बाद 1 जून 2021 को उनका स्थानान्तरण प्रभारी अधीक्षण अभियन्ता निर्माण मण्डल पौड़ी में किया गया और उन्होंने 4 जून 2021 को पौड़ी में पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन अपने चहते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट इंप्लीमेन्टशन यूनिट, अमृत योजना रुड़की में 5 जून 2021 से लेकर 28 जून 2021 नौ बार में 69,92,826 रुपये का भुगतान अवैध तरीके से किया। क्योंकि स्थानान्तरण के बाद जो अधिशासी अभियन्ता तैनात किया जाएगा यह उसकी जिम्मेदारी होगी। प्रोजेक्ट इंप्लीमेन्टशन यूनिट, अमृत योजना को कोई अतिरिक्त प्रभार भी इंजीनियर संजय सिंह का नहीं दिया गया था। जिसकी शिकायत महाप्रबन्धक से की गई तों जांच में वित्तीय अनियमितता पाई गई और जांच अधिकारी ने एक जांच कमेटी बनाकर जांच करने की संस्तुति की।
दूसरा मामला आराघर से मोथरोवाला तक सीवर लाइन बिछाने में भी इंजीनियर संजय सिंह ने खेल किया है। अपने चहेते ठेकेदार को काम दिलाने के लिए मुख्य अभियन्ता गढ़वाल मंडल होते हुए देहरादून की आराघर से मोथरोवाला तक सीवर लाइन को पहले की गई निविदा निरस्त कराई गई जबकि मुख्य अभियन्ता मुख्यालय देहरादून को निविदा निरस्त करने का अधिकार था। जिस ठेकेदार को दूसरी बार निविदा निकालने पर काम दिया गया उसे प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी व एडिशनल प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी की तौर पर 7,49,39,715.94 रुपयेजमा करने थे लेकिन इंजीनियर संजय सिंह ने 2,81,08,260.00 रुपये जमा करने के लिए कहा। यह पत्र इंजीनियर संजय सिंह ने मुख्य अभियन्ता गढ़वाल रहते हुए पत्र लिख कर कहा। जिससे ठेकेदार को 4,14,07,240,00 रुपये का लाभ पहुंचाते हुए सरकार को इतने रूपये का ही चूना लगाया गया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी व एडिशनल प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी के निर्धारण का अधिकार अधीक्षण अभियन्ता को होता है यह अधिकार मुख्य अभियन्ता को नहीं होता फिर भी इंजीनियर संजय सिंह ने प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी व एडिशनल प्रर्फोमेंश सिक्योरिटी का सीधा निर्धारण किया जिसका खुलासा विभागीय जांच मंे हुआ है और इसके लिए भी जाचं कमेटी बनाकर सम्पूर्ण जांच कराने की संस्तुति की गई है।

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