मक्कूमठ से श्रद्धा-उल्लास के साथ विदा हुई भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा
मक्कूमठ से प्रस्थान के बाद दिवारा यात्रा के जगपुड़ा पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोली का भव्य स्वागत किया।

जगपुड़ा पहुंचने पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर किया भव्य स्वागत
25 सितंबर को तुंगनाथ धाम पहुंचेगी डोली
रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की पावन घाटी इन दिनों भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा से भक्तिमय बनी हुई है। बुधवार को भगवती चामुण्डा की डोली ने तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ से अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान किया। मक्कूमठ में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने मां की डोली को भावभीनी विदाई दी। इस दौरान पूरा क्षेत्र मां चामुण्डा के जयकारों से गूंज उठा।
मक्कूमठ से प्रस्थान के बाद दिवारा यात्रा के जगपुड़ा पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोली का भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर मां का अभिनंदन किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं जनकल्याण की कामना की। डोली के गांव में पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। महिलाओं ने मंगलगीत गाए और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच मां चामुण्डा का स्वागत किया।
दिवारा यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा के साथ चल रहे श्रद्धालु भी पूरे भक्तिभाव के साथ मां की डोली के दर्शन कर रहे हैं। गांव-गांव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जागर, मंगलगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियां उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और प्राचीन देवी परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत कर रही हैं।
दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने बताया कि भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों और प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर आगे बढ़ रही है। यह यात्रा धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही क्षेत्र की प्राचीन देवी परंपराओं, लोक आस्था और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का माध्यम है। ग्रामीण यात्रा के दौरान अपनी आराध्य देवी से क्षेत्र की रक्षा और जनकल्याण की प्रार्थना करते हैं।
भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा 25 सितंबर को तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम पहुंचेगी। धाम में डोली के पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान मां चामुण्डा और भगवान तुंगनाथ से जुड़ी पौराणिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं का भी निर्वहन किया जाएगा।
समिति संयोजक कृपाल सिंह राणा ने बताया कि तुंगनाथ धाम के दर्शन के बाद दिवारा यात्रा मंडल घाटी की ओर प्रस्थान करेगा। इसके बाद विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों से होकर यात्रा आगे बढ़ेगी। प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोली का स्वागत करेंगे। इसके पश्चात भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा भूवैकुण्ठ बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होगी।
समिति सलाहकार त्रिलोक सिंह रावत ने कहा कि दिवारा यात्रा हिमालयी लोकजीवन में देवी आराधना की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। वहीं, समिति उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह तिन्दोरी ने कहा कि मक्कूमठ से जगपुड़ा तक यात्रा के दौरान उमड़ा श्रद्धा का सैलाब इस बात को दर्शाता है कि भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा क्षेत्रवासियों के लिए आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का महत्वपूर्ण पर्व है।



