
केदारनाथ हाईवे के तिलवाड़ा में एनएच की खुदाई से चार मंजिला मकान पर खतरा
लगातार बारिश के बीच भवन की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
प्रभा सकलानी बोलींकृतीन बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
मकान की नींव और संरचना की जांच, खुदाई पर सुरक्षा उपाय तथा उचित मुआवजे की मांग
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ हाईवे के तिलवाड़ा मुख्य बाजार में राष्ट्रीय राजमार्ग के नाली निर्माण के लिए की जा रही खुदाई ने एक चार मंजिला मकान की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। मकान को नुकसान पहुंचने और लगातार बारिश के बीच भवन की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताते हुए कैंसर पीड़ित प्रभा सकलानी ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी 2026 से अब तक तीन बार लिखित शिकायत देने के बावजूद संबंधित विभागों ने समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया। उन्होंने मकान की तत्काल तकनीकी जांच, खुदाई से हुए नुकसान का आकलन और उचित मुआवजे की मांग उठाई है।
प्रभा सकलानी ने बताया कि फरवरी 2026 में एनएच की खुदाई शुरू हुई थी, जो काम आज तक चल रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और संबंधित समिति को लिखित आवेदन देकर भवन की स्थिति से अवगत करा दिया था। उनका आरोप है कि खुदाई के कारण मकान की नींव कमजोर हो रही है और भवन आगे की ओर झुक रहा है। वहीं, लगातार बारिश से उनकी चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में भवन की सुरक्षा को लेकर तत्काल तकनीकी जांच जरूरी हो गई है।
प्रभा सकलानी ने पूर्व में की गई नाप-जोख पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों की पहली नाप में मकान का लगभग एक मीटर हिस्सा सड़क की सीमा में आ रहा था, लेकिन दोबारा नाप लेते समय पहले की सफेद पट्टी और मार्किंग को आधार नहीं बनाया गया। इसके बजाय नाली की ओर से नाप की गई, जिससे स्थिति बदल गई। उनका आरोप है कि अब मकान के बिल्कुल बाहर से खुदाई की जा रही है, जिससे भवन को और नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
प्रभा सकलानी ने बताया कि वह कैंसर से पीड़ित हैं और पिछले छह माह से एम्स ऋषिकेश में उपचार करा रही हैं। गंभीर बीमारी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनके लिए मकान की मरम्मत कराना संभव नहीं है। एक ओर वह बीमारी से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी ओर मकान को नुकसान पहुंचने की आशंका ने उन्हें मानसिक तनाव में डाल दिया है। उनका कहना है कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रभा सकलानी ने स्पष्ट किया कि वह विकास कार्य या सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि मकान की वास्तविक स्थिति और परियोजना की निर्धारित सीमा के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। यदि मकान का कोई हिस्सा परियोजना की सीमा में आता है तो नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। वहीं, यदि मकान सीमा से बाहर है, तो खुदाई से हुए नुकसान का तकनीकी आकलन कर उचित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मकान की नींव और संरचना का तत्काल निरीक्षण कराने, पूर्व एवं वर्तमान नाप-जोख की जांच करने तथा खुदाई के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की मांग की है। साथ ही, शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के मामले में जिम्मेदारी तय करने और आगे होने वाले संभावित नुकसान से भवन को बचाने के लिए शीघ्र कार्रवाई की अपील की है। अब सवाल यह है कि लगातार बारिश और खुदाई के बीच भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग कब ठोस कदम उठाएंगे और शिकायतों के निस्तारण के साथ प्रभावित परिवार को कब राहत मिलेगी।



