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केदारनाथ धाम में योग-प्राणायाम शिविर

ऊंचाई की चुनौती के बीच श्रद्धालुओं को मिल रहा संबल

केदारनाथ धाम में योग-प्राणायाम शिविर
ऊंचाई की चुनौती के बीच श्रद्धालुओं को मिल रहा संबल
स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम
रुद्रप्रयाग। बर्फीली हवाएं, कड़ाके की ठंड, सीमित ऑक्सीजन और समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई इन विषम परिस्थितियों के बीच केदारनाथ धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और जीवनदायी पहल शुरू की गई है। जिला अधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देशन में बाबा केदार की पावन धरती पर योग एवं प्राणायाम शिविर का शुभारंभ किया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए न केवल राहत बल्कि संबल का भी कार्य कर रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचते ही कई श्रद्धालु सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान, सिरदर्द और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से जूझते हैं। ऐसे में यह योग-प्राणायाम शिविर उनके लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन इसमें भाग लेकर अपने स्वास्थ्य को संतुलित कर रहे हैं और यात्रा को अधिक सुरक्षित बना रहे हैं।
प्रतिदिन प्रातः 10 से 11 बजे के बीच केदारनाथ मंदिर के पीछे निर्धारित स्थल पर अनुभवी योग प्रशिक्षकों द्वारा निःशुल्क योगाभ्यास कराया जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालु शारीरिक मजबूती के साथ-साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव कर रहे हैं। मंत्रोच्चार और प्राणायाम के बीच का यह वातावरण उन्हें बाबा केदार के सानिध्य में एक अलग ही दिव्य अनुभूति प्रदान कर रहा है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ आर. एस. पाल के अनुसार, “ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है। ऐसे में योग और विशेष रूप से प्राणायाम शरीर को वातावरण के अनुरूप ढालने में अत्यंत प्रभावी है। यूनानी चिकित्सा पद्धति भी संतुलित जीवनशैली और श्वास नियंत्रण पर विशेष बल देती है, जिससे रक्तचाप और श्वसन संबंधी समस्याओं में उल्लेखनीय राहत मिलती है।”
प्रशासन का यह प्रयास न केवल श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ‘स्वस्थ तीर्थयात्रा’ के संकल्प को भी साकार कर रहा है। योग, प्राणायाम और आस्था का यह संगम केदारनाथ यात्रा को एक नई सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रहा है, जहां श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी सशक्त होकर लौट रहे हैं।

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