उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू, जोशीमठ त्रिमुडिया मेला संपन्न

इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए आज देव पूजाई समिति के तत्वावधान में उग्रवीर देवता को विधिवत भोग अर्पित किया गया।

चमोली। गंगोत्री, यमुनोत्री के कपाट खुलने से चारधाम यात्रा का अगाज हो गया है। अब केदाररनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर में पौराणिक त्रिमुडिया मेले का भव्य आयोजन हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में पीपलकोटी के पास ‘ह्यूणा’ नामक स्थान पर त्रिमुडिया वीर का आतंक था, जो नरबलि लिया करता था। तब मां दुर्गा ने उसे वश में कर जोशीमठ लाकर यह शर्त रखी कि हर वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले उसे बकरे, कच्चे चावल और गुड़ का भोग लगाया जाएगा। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए आज देव पूजाई समिति के तत्वावधान में उग्रवीर देवता को विधिवत भोग अर्पित किया गया।
मेले के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं के पश्वा अवतरित हुए। उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस आयोजन में रैंकवाल पंचायत की अहम भूमिका रही। जिन्होंने माता दुर्गा का आलम त्रिमुडिया वीर के लिए लाकर परंपरा को आगे बढ़ाया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूदरी, उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र सती, सचिव प्रकाश नेगी और कोषाध्यक्ष आशिष चंद्र सती मौजूद रहे। वहीं रैंकवाल पंचायत के अध्यक्ष अनूप नेगी, उपाध्यक्ष सोहन सिंह बैजवाणी और सचिव सुभाष पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए। धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कराने में दुर्गा जी के पश्वा भोला सिंह नामण, भुवनेश्वरी के पश्वा आदित्य भूषण सती, चंडिका जी के पश्वा प्रकाश नेगी, दाणी माता के पश्वा अंकित मेहरा और त्रिमुडिया के पश्वा कन्हैया बेजवाड़ी की विशेष भूमिका रही।त्रिमुडिया मेले के सफल आयोजन के साथ ही अब बदरी विशाल के कपाट खुलने की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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