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प्रदेश में 24 घंटे में हुई रिकार्ड वनाग्नि की 52 घटनाएं घटित

बीते वर्ष नवंबर से अब तक लगातार घट रही वनाग्नि की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। जिससे पहाड़ों पर चारों और धुआं छाया हुआ है।

5 महीने में दर्ज हुई 431 घटनाएं
वनाग्नि की 11 लाख से ज्यादा की वन संपदा खाक
गढ़वाल मंडल में हुई 177 तो कुमांऊ में हुई 215 घटनाएं, संरक्षित वन क्षेत्र में 39 स्थानों पर लगी आग
देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाएं अब बढ़ने लगी हैं। इस सीजन की सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई। प्रदेश में पिछले 24 घंटे के भीतर 52 जगह पर आग लगी, जिसे बुझाने में वन महकमे के पसीने छूट गए। चिंता की बात यह है कि घटनाओं के इस नए रिकॉर्ड ने आने वाले दिनों में वनाग्नि की दिक्कतों के बढ़ने के भी संकेत दे दिए।
उत्तराखंड के लिए मंगलवार का दिन बेहद चिंता भरा रहा। दरअसल प्रदेश के जंगलों में आग की घटनाओं ने इस सीजन के रिकॉर्ड तोड़ दिए। राज्य भर के जंगलों में कुल 52 जगहों पर आग लगने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई। इसमें 14 घटनाएं गढ़वाल मंडल में हुई तो वहीं 35 घटनाएं कुमाऊं मंडल के जंगलों के रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा तीन घटनाएं वन्य जीव संरक्षित वन क्षेत्रों में मिली। इस तरह सोमवार को 24 घंटे के दौरान कुल 76.65 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुए। जिसमें 165,300 रुपए की आर्थिक क्षति रिकॉर्ड की गई है।
प्रदेश में 1 नवंबर से अब तक आग लगने की कुल 431 घटनाएं रिकॉर्ड की जा चुकी हैं। इसमें गढ़वाल मंडल वाले वन क्षेत्र में 177 घटनाएं हुई हैं। कुमाऊं मंडल के जंगलों में 215 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। उधर वन्य जीव संरक्षित वन क्षेत्र में 39 जगह पर आग लगने की शिकायतें मिली हैं। इस तरह करीब 5 महीने से ज्यादा समय में राज्य के 516.92 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुए, जिसमें अब तक राज्य को 1,113,451 रुपए का नुकसान हो चुका है।
इस बीच अच्छी बात यह है कि प्रदेश में इतने समय के दौरान जितनी भी घटनाएं हुई उसमें कोई भी मानव या पशु क्षति नहीं हुई है। राज्य में सोमवार को जिस तरह इस सीजन की रिकॉर्ड घटनाएं दर्ज की गई हैं, उसने आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं को लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ा दी हैं। हालांकि आने वाले दिनों में तापमान के गर्म होने के कारण ऐसी घटनाओं में और इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश में एपीसीसीएफ निशांत वर्मा ने बताया कि जंगलों में लग रही आग को लेकर विभाग पूरी तरह से संवेदनशील है और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उधर वन विभाग की तरफ से पहले ही विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में जंगलों की आग को लेकर अतिरिक्त तैयारी भी की गई है।

सरोवर नगरी नैनीताल के चारों ओर भीषण आग से धधक रहे हैं जंगल
नैनीताल। गर्मियां शुरू होते ही नैनीताल समेत कुमाऊं भर के जंगलों में आग लगने की घटनाओं मैं तेजी से बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। सरोवर नगरी समेत आसपास के क्षेत्र के जंगलों में 24 घंटे से आग लगी हुई है। आग से जंगल जलकर खाक हो गए हैं।
नैनीताल के बलदियाखान, ज्योलिकोट, मंगोली, खुरपाताल, देवीधुरा, भवाली, भीमताल और मुक्तेश्वर समेत आसपास के जंगलों में इन दिनों भीषण आग लगी है। जिससे अमूल्य वन संपदा चलकर खाक हो रही है। वहीं दूसरी ओर वायुमंडल और इंसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जंगल आग उगल रहे हैं। वनाग्नि के कारण चारों तरफ धुआं छाया हुआ है। इससे हवा में पीएम 2.5 के स्तर में करीब पांच गुना बढ़ोत्तरी हो गई है। इन हालात ने वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को चिंता में डाल दिया है।
15 फरवरी से 15 जून तक का फायर सीजन प्रदेश के जंगलों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। शीतकाल में यदि अच्छी वर्षा और बर्फबारी हो जाए, तो जंगलों में आग लगने की अवधि पीछे खिसक जाती है। मगर इस वर्ष अन्य वर्षों की अपेक्षा बर्फबारी की बेरुखी के परिणाम गर्मी के मौसम के शुरुआत में ही नजर आने लगे हैं। अप्रैल की शुरुआत से ही अनियंत्रित रूप से सामने आ रही वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बीते वर्ष नवंबर से अब तक लगातार घट रही वनाग्नि की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। जिससे पहाड़ों पर चारों और धुआं छाया हुआ है।

स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है आग से निकलने वाला धुआं
देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग जहां एक तरफ वायुमंडल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है, तो वही इंसानों के स्वास्थ्य के लिए इसका धुआं बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। बीडी पांडे अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर एस दुग्ताल बताते हैं जंगलों की आग से निकलने वाले धुएं से सांस की खतरनाक बीमारी, कैंसर समेत कई घातक बीमारियां हो सकती हैं। बुजुर्गों के लिए जंगलों का धुआं बेहद खतरनाक है, लिहाजा इससे बचाव किया जाना चाहिए।

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