उत्तराखंड

15 साल बाद हुआ भगवती चामुण्डा-जाखराजा का ऐतिहासिक मिलन

इससे क्षेत्र की लोक आस्था, संस्कृति और सदियों पुरानी देव परंपराएं एक बार फिर जीवंत हो उठी हैं।

बुरुवा से भावुक विदाई के बाद गडगू में हुआ रात्रि प्रवास
आज गिरीया पहुंचेगी दिवारा यात्रा
रुद्रप्रयाग। मद्महेश्वर घाटी में मां भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ आगे बढ़ रही है। बुधवार को बुरुवा गांव से भावुक विदाई के बाद दिवारा यात्रा सीमांत गांव गडगू पहुंची, जहां 15 वर्षों बाद भगवती चामुण्डा और जाखराजा का ऐतिहासिक मिलन हुआ। इस दुर्लभ धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गडगू पहुंचे।
बुरुवा गांव से विदाई के दौरान ग्रामीणों और धियाणियों ने भावुक होकर मां भगवती से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और मां के जयकारों के बीच ग्रामीणों ने भगवती को अगले पड़ाव के लिए विदा किया। इसके बाद दिवारा यात्रा गडगू गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवती का भव्य स्वागत किया।
गडगू में 15 वर्ष बाद हुआ चामुण्डा-जाखराजा का मिलन दिवारा यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा। पूजा-अर्चना के बीच दोनों देव शक्तियों के मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। देर तक गांव में देवी-देवताओं के जयकारे गूंजते रहे। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धार्मिक क्षण के साक्षी बनने पहुंचे।
दिवारा यात्रा के चलते इन दिनों पूरी मद्महेश्वर घाटी भक्तिमय बनी हुई है। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवती का स्वागत और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इससे क्षेत्र की लोक आस्था, संस्कृति और सदियों पुरानी देव परंपराएं एक बार फिर जीवंत हो उठी हैं।
गडगू में रात्रि प्रवास के बाद गुरुवार को दिवारा यात्रा गिरीया गांव पहुंचेगी। ग्रामीण भगवती के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं। दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने बताया कि गिरीया के बाद यात्रा मनसूना, फापज, पाली और सरूणा गांवों का भ्रमण करते हुए भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा ऊखीमठ का भ्रमण कर तुंगनाथ घाटी में प्रवेश करेगी।
इस अवसर पर आचार्य राजेंद्र प्रसाद देवशाली, सत्यानंद भट्ट, अनूप भट्ट, अमित भट्ट, ग्राम प्रधान मदन भट्ट, सरिता नेगी, पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह धिरवाण, वन पंचायत सरपंच माणिक लाल, राकेश धिरवाण, रघुवीर सिंह नेगी, समिति संरक्षक कृपाल सिंह राणा, सलाहकार त्रिलोक सिंह रावत, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह तिन्दोरी, सचिव कीरत सिंह राणा, सह सचिव राजेंद्र सिंह राणा, कोषाध्यक्ष योगम्बर सिंह रावत सहित बुरुवा, गैड़ और गडगू के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भगवती चामुण्डा और जाखराजा का मिलन मद्महेश्वर घाटी की दिवारा यात्रा में आस्था का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। इस मिलन ने न केवल श्रद्धालुओं को भावविभोर किया, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं की गहरी जड़ों को भी एक बार फिर सामने ला दिया।

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