उत्तराखंड
रुद्रप्रयाग के तिमली-बड़मा मोटर मार्ग पर भरभराकर ढही पहाड़ी
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

मलबा आने से सड़क बंद होने के कारण 80 गांवों का टूटा संपर्क
पहाड़ी ढ़हने वाला स्थान 2013 की आपदा के समय से बना हुआ है संवेदनशील क्षेत्र
पीडब्ल्यूडी कई साल पहले भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के स्थाई ट्रीटमेंट के लिए प्रस्ताव शासन को भेज चुका है
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। गुरुवार को तिमली-बड़मा मोटर मार्ग पर अचानक पहाड़ी का विशाल हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर पूरी सड़क पर फैल गए और मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इसके साथ ही करीब 80 गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया। मार्ग बंद होने से ग्रामीणों के सामने आवाजाही, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दैनिक जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है।
सबसे गंभीर बात ये है कि जिस स्थान पर यह भूस्खलन हुआ, वो साल 2013 की आपदा के बाद से लगातार संवेदनशील बना हुआ है। हर मानसून में यहां पहाड़ी दरकती है और सड़क कई-कई दिनों तक बंद रहती है। इसके बावजूद स्थायी उपचार आज तक शुरू नहीं हो सका। लोक निर्माण विभाग ने इस भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के स्थायी ट्रीटमेंट के लिए 26 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेज रखा है, लेकिन स्वीकृति के अभाव में योजना सालों से फाइलों में अटकी हुई है।
मार्ग बंद होने का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों पर पड़ा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, छात्रों के स्कूल-कॉलेज आने-जाने, किसानों की उपज बाजार तक पहुंचाने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर संकट गहरा गया है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल सफर तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
भूस्खलन की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गई। लगातार बारिश और ऊपर से गिर रहे पत्थरों के बीच मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही मार्ग को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने शासन से मांग की है कि प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति देकर इस संवेदनशील क्षेत्र का स्थायी समाधान किया जाए। ताकि, हर मानसून में 80 गांवों के लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। वहीं, पहाड़ी के दरकने का वीडियो भी सामने आया है। जहां मलबा गिरने के साथ ही धूल का गुबार उठता दिख रहा है।



