ठंड से बेरीनाग महाविद्यालय में परीक्षा दे रही दो छात्राएं हुई बेहोश
छात्राओं को उठाकर धूप में ले जाया गया और गर्म चाय पिलाई गई। वहीं कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के अभिभावकों को सूचना दी।

सूचना मिलने पर पहुंचे अभिभावकों ने जताया रोष
पिथौरागढ़। पहाड़ों में एक ओर हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है, वहीं बेरीनाग में इन दिनों में पिछले एक सप्ताह से बहुत अधिक ठंड पड़ रही है। ठंड के मौसम में उच्च शिक्षा विभाग महाविद्यालयों में परीक्षाएं आयोजित कर रहा हैं। सुबह और दोपहर की पाली में परीक्षा हो रही हैं। बेरीनाग महाविद्यालय में सुबह 9 बजे से हुई पहली पाली में बीए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान दो छात्राएं ठंड लगने से बेहोश हो गई। जिससे परीक्षा कक्ष में मौजूद परीक्षकों के हाथ पांव फूल गए। छात्राओं को उठाकर धूप में ले जाया गया और गर्म चाय पिलाई गई। वहीं कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के अभिभावकों को सूचना दी। कुछ देर के बाद छात्राएं होश में आई, तब जाकर कॉलेज प्रशासन ने राहत की सांस ली।
इधर बेरीनाग में माइनस 4 ड्रिगी का तापमान था। ठंड के मौसम में परीक्षाएं आयोजित कराए जाने पर अभिभावकों ने नाराजगी जताई है। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष हेम पंत, चारू पंत, महेश कार्की ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ठंड के मौसम में परीक्षा कराने को लेकर आक्रोश व्यक्त किया और ठंड के मौसम में परीक्षा ना कराने की मांग की है। कहा कि यदि छात्र छात्राओं का स्वास्थ्य खराब होता तो उसकी जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग की होगी।
प्रो. बीएम पांडेय प्राचार्य ने बताया कि सर्दी को देखते हुए पूर्व में परीक्षाएं ठंड के मौसम में नहीं किराये जाने को लेकर उच्च शिक्षा सचिव, निदेशक और कुलपति को 15 दिन पूर्व पत्र भेज दिया गया था। वर्तमान में यहां पर बहुत अधिक ठंड है परीक्षा कराने के लिए उचित समय नहीं है।
बता दें कि बेरीनाग महाविद्यालय में इन दिनों ठंड में परीक्षा चल रही है। लेकिन किसी भी कक्ष में हीटर नहीं लगाया जा रहा है। कपकपाती ठंड में छात्र छात्राएं परीक्षा दे रही हैं, महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि परीक्षा कक्ष में हीटर लगाने की कोई प्रावधान नहीं है। 24 जनवरी तक 1200 छात्र छात्राएं परीक्षा देंगे। उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा वर्ष भर 40 दिन का अवकाश का नियम है। जिसमें 20 दिन ठंड के मौसम और 20 दिन गर्मी की छुट्टी होती है। लेकिन यह नियम पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के महाविद्यालयों के लिए एक समान हैं। जबकि पहाड़ी क्षेत्र के महाविद्यालयों के लिए अवकाश के मानक मौसम के अनुसार होने चाहिए।



