उत्तराखंड

उत्तरकाशी के स्यानाचट्टी में फिर बनने लगी झील

रविवार को एक बार वह फिर होटल, आवासीय भवनों में लोगों के घरों में पानी घुस गया। जिससे लोग दहशत में आ गये।

रविवार को फिर से पुल के ऊपर से गुजरने लगा पानी
होटल, आवासीय भवनों व लोगों के घरों में घुसा पानी  
झील बनने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य मौके के लिए हुए रवाना

उत्तरकाशी। स्यानाचट्टी कस्बे में एक बार फिर झील बनने से लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्षेत्र में लगाता हो रही बारिश के कारण एक बार कस्बे में झील बनने से लोगों के घरों में पानी घुस गया है। यमुना पर बना पुल पर पेड़ आकर फंस गए हैं, जिससे नदी का पानी अब पुल के ऊपर से बह रहा है। जिस कारण लोगों में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया है। वहीं जिलाधिकारी मौके के लिए रवाना हो गए हैं।
पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश से उत्तरकाशी के यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी में हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। यहां बनी झील के बाद अब यमुना का बढ़ा हुआ जलस्तर लोगों को डरा रहा है। स्थिति यह है कि यमुनोत्री हाईवे पर बना मोटर पुल यमुना के ऊपर से पानी निकल रहा है। नदी किनारे बने होटल कई दिन से आधे पानी में डूबे हैं। रविवार को एक बार वह फिर होटल, आवासीय भवनों में लोगों के घरों में पानी घुस गया। जिससे लोग दहशत में आ गये।
स्थानीय लोग शैलेंद्र सिंह राणा, नवदीप रावत ने बताया कि रातभर हुई भारी बारिश के कारण स्यानाचट्टी क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया है। नदी का तेज बहाव अब स्यानाचट्टी कस्बे के लिए बड़ा खतरा बनाता जा रहा है। यमुना का बहाव इतना तेज है कि मोटर ब्रिज पर पेड़ आकर फंस गए हैं और नदी का पानी अब पुल के ऊपर से बह रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि यमुना नदी का पानी कालन्दी होटल की दूसरी मंजिल तक पहुंच गया है और अब पार्किंग क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। जिससे लोग एक बार फिर से दहशत में आ गये हैं। वहीं झील बनने पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य मौके के लिए रवाना हो गए हैं।
सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग राकेश बिजल्वाण नदी के चौनलाइजेशन के लिए विभाग की तीन मशीनें लगातार काम कर रही हैं, ताकि नदी के प्रवाह को सामान्य किया जा सके और पुल पर खतरा कम हो। लेकिन लगातार बारिश के कारण कुपड़ा गाड़ में मलबा आने से झील दोबार बन रही है। जिससे समस्या आ रही है, जल्द ही झील को खोल दिया जाएगा।
स्यानाचट्टी में यमुना नदी में बनी झील की समस्या नई नहीं है। यह समस्या धराली आपदा से भी पहले 28 जून को कुपड़ा गाड़ के उफान पर आने के साथ आए मलबे के कारण उत्पन्न हुई थी। जो बीते 21 अगस्त को तब गंभीर हो गई। जब दोबारा उफान पर आए कुपड़ा गाड़ के साथ आए मलबे में नदी का प्रवाह अवरुद्ध कर दिया। हालांकि इससे एक दिन बाद ही नदी के उफान पर आने से झील खाली हो गई थी, लेकिन 24 अगस्त से नदी का जलस्तर घट बढ़ रहा है। इससे स्यानाचट्टी के लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई है।

आपदा प्रभावितों के लिए राहत सामग्री
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली क्षेत्र में आई आपदा ने ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों को रामनगर की प्रयास सेवा संस्था ने मदद भेज रही है। संस्था की ओर से 200 बैग राशन और जरूरी सामान थराली भेजा गया है, इन बैगों में चावल, आटा, दाल, तेल, हल्दी, नमक, धनिया, मिर्च समेत सभी दैनिक उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं। पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत भी स्वयं राहत सामग्री के साथ थराली रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों की मदद करना हर सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। कहा कि यह केवल शुरुआत है, आगे प्रभावित क्षेत्रों से जैसी भी मांग और जरूरतें सामने आएंगी, उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।

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