उत्तराखंड

मोक्षधाम बदरीनाथ के दर्शन कर लौटीं मां चामुण्डा, जयकारों से गूंजा जाल मल्ला

भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक बनी।

पुष्पवर्षा और पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ दिव्य डोली का भव्य स्वागत
भंडार गृह में विराजमान होते ही तृतीय चरण की दिवारा यात्रा का विधिवत समापन

रुद्रप्रयाग। मोक्षधाम बदरीनाथ के दर्शन कर लौटीं भगवती चामुण्डा की दिव्य डोली के जाल मल्ला पहुंचने पर पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। आराध्य देवी के आगमन पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा-भाव के साथ भव्य स्वागत किया। मां चामुण्डा के जयकारों के बीच गांव में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद देवी की डोली को भंडार गृह में विराजमान किया गया। इसी के साथ भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा का विधिवत समापन हो गया।
भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक बनी। यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों और पड़ावों पर श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। जगह-जगह ग्रामीणों ने अपनी आराध्य देवी का स्वागत कर अटूट श्रद्धा का परिचय दिया। बदरीनाथ धाम के दर्शन के बाद मां की डोली के सकुशल जाल मल्ला लौटने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
दिवारा यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं की सहभागिता ने धार्मिक आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। मां चामुण्डा के प्रति लोगों की आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति समर्पण ने क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक विरासत को जीवंत किया। डोली के भंडार गृह में विराजमान होने के साथ ही इस चरण से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो गए।
दिवारा यात्रा के सफल समापन पर समिति ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न पड़ावों पर मां की अगवानी करने वाले भक्तों का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि सभी के सहयोग, सहभागिता और मां भगवती के प्रति अटूट श्रद्धा से यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। समिति ने भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग और सहभागिता बनाए रखने की अपील की।
मां चामुण्डा की दिवारा यात्रा के समापन के साथ ही जाल मल्ला में धार्मिक परंपरा, सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकजुटता की एक यादगार छाप छोड़ गई।

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