सिद्धपीठ कालीमठ में उमड़ा आस्था का सैलाब, दस कुंतल फूलों से सजा मां का दरबार
मंदिर परिसर में धूप-दीप, मंत्रोच्चार और देवी स्तुति से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। मुख्य मंदिर सहित सहायक मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के दर्शन-पूजन को पहुंच रहे श्रद्धालु
सुख-समृद्धि और खुशहाली की मांग रहे मनौती
रुद्रप्रयाग। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर सिद्धपीठ कालीमठ में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मां भगवती के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है। दस कुंतल फूलों से सजे मां के भव्य दरबार की दिव्यता श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है। भक्त मां काली के दिव्य धाम में शीश नवाकर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, आरोग्यता और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
नवरात्र के चलते कालीमठ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो रहा है। मंदिर परिसर में धूप-दीप, मंत्रोच्चार और देवी स्तुति से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। मुख्य मंदिर सहित सहायक मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पुष्पों से सजे मां के दरबार की भव्यता धाम की आध्यात्मिक आभा को और बढ़ा रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां भगवती से मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांग रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कालीमठ मां भगवती की आराधना के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। नवरात्र के दौरान यहां देवी उपासना, धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मां के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते धाम में इन दिनों विशेष रौनक बनी हुई है। मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण श्रद्धालुओं को देवी आराधना से जोड़ रहा है।
वेदपाठी रमेश चंद्र भट्ट के अनुसार, नवरात्र शक्ति की उपासना का महापर्व है। इन नौ दिनों में मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु आत्मिक शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और लोककल्याण की कामना करते हैं। देवी उपासना भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
पंडित दिनेश चंद्र गौड़ के अनुसार, सच्ची श्रद्धा, संयम और सद्कर्म के साथ की गई भगवती की आराधना व्यक्ति को आत्मबल प्रदान करती है। साथ ही समाज में सद्भाव, सकारात्मकता और कल्याण की भावना को मजबूत करती है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर समिति की ओर से मंदिर परिसर की साज-सज्जा और धार्मिक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही के बीच कालीमठ धाम आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दस कुंतल फूलों से सजा मां का दिव्य दरबार और देवी आराधना में लीन श्रद्धालु शारदीय नवरात्र की धार्मिक छटा को और भव्य बना रहे हैं।



