उत्तराखंड

सोनप्रयाग में अव्यवस्थाओं का विस्फोट, श्रद्धालुओं की जान भगवान भरोसे

श्रद्धालु सीट पाने के लिए एक-दूसरे पर चढ़ते नजर आ रहे हैं। कई लोग वाहनों के दरवाजों और छतों तक पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं।

प्रशासनिक दावों की खुली पोल, पुलिस व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
भगदड़ जैसे हालात में फंसे हजारों श्रद्धालु, महिलाएं-बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान

रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड की सबसे बड़ी आस्था यात्रा इस समय अव्यवस्था, अफरा-तफरी और प्रशासनिक लापरवाही के सबसे भयावह दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग में हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि श्रद्धालुओं के बीच चीख-पुकार, धक्कामुक्की और भगदड़ जैसे दृश्य आम हो गए हैं। गौरीकुण्ड जाने के लिए शटल सेवा में बैठने को लेकर ऐसी मारामारी मची हुई है कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वाहनों की छतों तक पर चढ़ने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
जिस यात्रा को लेकर सरकार और प्रशासन लगातार हाईटेक व्यवस्थाओं और सुरक्षा के दावे कर रहे थे, वहीं सोनप्रयाग में जमीनी हकीकत उन तमाम दावों का मजाक उड़ाती नजर आ रही है। हजारों श्रद्धालु घंटों से लाइन में फंसे हैं, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासन भीड़ नियंत्रण में पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से भेजने के बजाय अचानक भारी भीड़ छोड़ दी जा रही है, जिससे शटल वाहनों में बैठने के लिए धक्कामुक्की और अफरा-तफरी चरम पर पहुंच चुकी है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि किसी भी समय एक छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है।
प्रशासन दावा कर रहा है कि सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड तक 250 से अधिक शटल वाहन लगाए गए हैं, लेकिन जमीनी तस्वीरें इन दावों की सच्चाई बयान कर रही हैं। श्रद्धालुओं का आरोप है कि वाहन होने के बावजूद पुलिस कई यात्रियों को जबरदस्ती पैदल भेज रही है, जबकि दूसरी ओर हजारों लोग घंटों से वाहन का इंतजार करते हुए परेशान खड़े हैं।
भीषण भीड़ के बीच महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर धक्कामुक्की झेलने को मजबूर हैं। बुजुर्ग श्रद्धालु गिरते-पड़ते नजर आ रहे हैं। कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं। आस्था की इस यात्रा में श्रद्धालुओं को सुविधा नहीं, बल्कि अव्यवस्था और भय मिल रहा है।
सोनप्रयाग में शटल सेवा का दृश्य किसी आपदा क्षेत्र से कम नहीं दिखाई दे रहा। श्रद्धालु सीट पाने के लिए एक-दूसरे पर चढ़ते नजर आ रहे हैं। कई लोग वाहनों के दरवाजों और छतों तक पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि अगर इसी दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

आईजी गढ़वाल के निरीक्षण के 24 घंटे बाद ही बिखर गई व्यवस्था
रूद्रप्रयाग।  गौरतलब है कि रविवार को गढ़वाल परिक्षेत्र के आईजी राजीव स्वरूप ने सोनप्रयाग पहुंचकर यात्रा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया था। लेकिन महज 24 घंटे बाद सामने आए हालात ने प्रशासनिक दावों की पूरी सच्चाई उजागर कर दी।

करोड़ों खर्च, फिर भी श्रद्धालु असुरक्षित
रूद्रप्रयाग।  हर वर्ष करोड़ों रुपये यात्रा व्यवस्थाओं के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। आखिर क्यों हर साल आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं को अव्यवस्था, धक्कामुक्की और जान का खतरा झेलना पड़ता है?

यात्रा पर प्रशासन की पैनी नजरः बिष्ट
रूद्रप्रयाग। मामले में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रुद्रप्रयाग धर्मेंद्र सिंह बिष्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड तक यात्रियों की आवाजाही को लेकर पर्याप्त संख्या में शटल वाहन संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या तथा रात्रि में संचालित एक मालवाहक ट्रक के मार्ग पर खराब होने के कारण गौरीकुण्ड से वापस सोनप्रयाग आने वाली कुछ शटल सेवाएं अल्प समय के लिए विलंब से पहुंचीं, जिस कारण सड़क मार्ग पर पैदल आवागमन बढ़ने से कुछ स्थानों पर अस्थायी भीड़ की स्थिति बनी। इस दौरान कुछ यात्रियों द्वारा बिना कतारबद्ध हुए वाहनों में चढ़ने का प्रयास किया गया, जिसे पुलिस एवं प्रशासन द्वारा तत्काल नियंत्रित करते हुए स्थिति को पूर्णतः सामान्य कर दिया गया। वर्तमान में सोनप्रयाग से गौरीकुंड को लेकर संचालित शटल सेवा व्यवस्था पूर्ण रूप से सुचारु है तथा सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित कतारबद्ध तरीके से शटल सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन द्वारा लगातार मॉनिटरिंग करते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी श्रद्धालु को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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