उत्तराखंड
केदारनाथ यात्रा से पहले एनएच तैयारियों पर सवाल, हालात चिंताजनक
सड़क किनारे दुकानदारों ने सामान फैलाने से पैदल यात्रियों और वाहनों दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बैठकों में दावे बड़े, धरातल पर व्यवस्थाएं कमजोर; यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
रुद्रप्रयाग। आगामी केदारनाथ यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और जिला प्रशासन की तैयारियां सवालों के घेरे में है। सिरोबगड़ से गौरीकुंड तक के मुख्य यात्रा मार्ग पर जगह-जगह मलबा जमा है, नालियां जाम पड़ी हैं और बाजारों में अतिक्रमण के कारण लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। सड़क किनारे दुकानदारों ने सामान फैलाने से पैदल यात्रियों और वाहनों दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारी भी इस समस्या को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्ती नहीं बरती जा रही।
यात्रा मार्ग पर बने कई डेंजर जोन अब भी बिना उपचार के हैं, जो बारिश के दौरान भूस्खलन का बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि जो कार्य महीनों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे, वे अब यात्रा शुरू होने से ठीक पहले शुरू किए जा रहे हैं, जिससे एनएच विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा, तिलवाड़ा-मयाली-घनसाली और मयाली-गुप्तकाशी मोटर मार्गों की स्थिति भी बेहद खराब बनी हुई है, जहां गड्ढे, टूटी सड़कें और जाम की समस्या आम हो चुकी हैं।
जिला प्रशासन और एनएच विभाग द्वारा लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि यात्रा से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। न तो मलबा पूरी तरह हटाया गया, न नालियों की सफाई हुई और न ही डेंजर जोनों का समुचित उपचार किया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ बैठकों और कागजी दावों तक सीमित रह गई है?
यदि यात्रा शुरू होने से पहले इन कमियों को तत्काल दूर नहीं किया गया, तो न केवल यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी रहेगी। ऐसे में एनएच विभाग और जिला प्रशासन के लिए जरूरी हो गया है कि वे दावों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करें, ताकि केदारनाथ यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो



