
मैदानी जिलों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में हत्याओं से लोगों में खौफ
बाहरी राज्यों से आए छात्रों में गैंगवार को लेेकर लोगों में बच्चों को लेकर असुरक्षा का भाव
अदालतों की जा रही पुलिसिया कमजोर पैरवी का भी लाभ ले रहे अपराधी
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में बीते कुछ महीनों के दौरान बढ़ते अपराधों ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की राजधानी देहरादून समेत हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल व कई पर्वतीय जिलों में सामने आए मामलों ने आमजन में असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। दून में झारखंड के हिस्ट्रीशीटर की खुले आम हत्या, उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्रों में गैंगवॉर, बढ़ी महिलाओं की हत्याएं, हुड़दंग, नशा तस्करी, जमीन से जुड़़ी धोखाधड़ी, प्रदेश बाहरी अपराधियों की सक्रियता और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के मुद्दे अब प्रमुख चिंता बनकर उभरे हैं। यह सवाल प्रदेशवासियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा दर्शा रहे हैं।
राजधानी देहरादून में राजपुर रोड, प्रेमनगर और पटेलनगर क्षेत्रों से देर रात हुड़दंग होता हुडदंग, मारपीट और स्टंटबाजी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। प्रदेश में आए दिन नशा तस्करी के मामलों में कार्रवाई के बावजूद सप्लाई नेटवर्क खत्म न होने पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच झारखंड के एक हिस्ट्रीशीटर की राजधानी में दिन निकलते ही वीआईपी रोड राजपुर रोड खुलेआम हत्या ने कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हरिद्वार के ज्वालापुर और सिडकुल क्षेत्र में चोरी, लूट और स्नैचिंग, लोन डिफॉल्टर वाहन रिकवरी एजेंटों की दबंगई की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर में नशा तस्करी, अवैध हथियार और श्रमिक विवाद से जुड़े मामले सामने आए हैं, जबकि नैनीताल जिले के हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्रों में स्टंटबाजी और वसूली की घटनाएं चर्चा में रहीं। उधमसिंह नगर में दिन दिहाड़े आधुनिक हथियारों से गुरूद्वारा प्रबंधक की हत्या ने भी प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
राज्य में जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी आई है। देहरादून, हरिद्वार, काशीपुर और हल्द्वानी में फर्जी रजिस्ट्री, डबल सेलिंग, अवैध प्लॉटिंग और सरकारी व वन भूमि को निजी बताकर बेचने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सख्त पुलिस कार्रवाई के चलते कुछ अपराधियों के उत्तराखंड को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। सीमावर्ती जिलों में बाहरी अपराधियों की आवाजाही को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
इन परिस्थितियों के बीच पुलिस कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामलों की मजबूत विवेचना भी जरूरी है। कई मामलों में कमजोर धाराओं और अपर्याप्त साक्ष्यों के चलते आरोपी जल्द जमानत पर छूट जाते हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। ऐसे में अपेक्षा की जा रही है कि मामलों में सख्त धाराएं लगाई जाएं, साक्ष्य संकलन को मजबूत किया जाए और समयबद्ध तरीके से ठोस चार्जशीट दाखिल की जाए। साथ ही, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस नेटवर्क) को और अधिक सक्रिय किए जाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत करने, अंतर-राज्यीय सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करने और संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते निगरानी रखने से कई घटनाओं को पहले ही रोका जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में तत्कालीन प्रभारी डीजीपी अभिनव कुमार ने ‘एनकाउंटर कल्चर’ को लेकर दिया गया बयान भी उस समय चर्चा में रहा था। वर्तमान हालात में एक वर्ग सख्त पुलिसिंग की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई पर जोर दे रहा है। फिलहाल, प्रदेश में बढ़ते अपराधों के बीच आम जनता की मांग स्पष्ट है। सुरक्षित माहौल, प्रभावी पुलिसिंग, मजबूत खुफिया तंत्र और ऐसा तंत्र, जिसमें अपराधियों के मन में कानून का वास्तविक भय स्थापित हो सके।



