उत्तराखंड

पिंडर घाटी में सीजन की दूसरी बर्फबारी

बर्फबारी और बारिश के कारण क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और बाजारों में लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई है।

ऊंचाई वाले गांव बर्फ की चादर में लिपटे
चमोली। पिंडर घाटी के ऊंचाई पर बसे गांवों और पहाड़ियों में सीजन की दूसरी बर्फबारी से पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है। घाटी की लगभग सभी पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। मंगलवार दोपहर से निचले इलाकों में रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश के चलते ठंड में भी खासा इजाफा हुआ है। बर्फबारी और बारिश के कारण क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और बाजारों में लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई है।
बताया गया कि बसंत पंचमी, 23 जनवरी को पिंडर घाटी के 1900 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बसे गांवों में जमकर बर्फबारी हुई थी, जबकि निचले क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद एक बार फिर मंगलवार दोपहर से ऊंचाई वाले इलाकों में तेज बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया, जो समाचार लिखे जाने तक बुधवार को भी जारी रहा।
अब तक थराली विकासखंड के बधागढ़, ग्वालदम, तलवाड़ी, मालबज्वाड़, कब्बीनगर, रतगांव, रूइसाण, कूनी, पार्था और गेरूड़ समेत देवाल विकासखंड के घेस, हिमनी, बलाण, पिनाऊ, दिदिना, रामपुर, तोरती, उदेपुर, मानमती, चौड़, देवसारी, सवाड़, गुविला, बेराधार और बमोटिया जैसे 1900 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बसे गांव बर्फ की मोटी परत से ढक गए हैं। अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में एक से दो फीट तक बर्फ जमने से ग्रामीणों को आवाजाही और रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निचले क्षेत्रों में बीते करीब 18 घंटों से लगातार हो रही बारिश से ठंड और बढ़ गई है। हालांकि लंबे समय बाद हुई बर्फबारी और बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। लोगों को रबी फसलों के बेहतर उत्पादन, जलस्रोतों के रिचार्ज होने और आने वाली गर्मियों में पानी के संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।

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