
हरीश रावत ने अन्य मामलों पर धामी सरकार को घेरा
देहरादून। उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू हुए 27 जनवरी को एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर जहां धामी सरकार प्रदेश भर में कार्यक्रम आयोजित यूसीसी के फायदे बता रही है तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रातव ने यूसीसी को सनातन धर्म पर हमला बताया है। हरीश रावत ने दिल्ली में यूसीसीपर अपनी प्रतिक्रिया दी।
हरीश रावत ने यूसीसीको सनातन धर्म पर हमला बताते हुए कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बीजेपी इसके लिए अपनी कितनी भी तारीफ करें। बता दें कि राज्य सरकार की तरफ से देहरादून में यूसीसी की पहली वर्षगांठ पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस मौके पर सीएम धामी ने भी अपना संबोधन किया।
सीएम धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में सदैव एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। एक साल पहले 27 जनवरी 2025 को यूसीसी को देवभूमि की जनता को समर्पित किया गया था। यूसीसी ने राज्य में समानता और सामाजिक सद्भाव की नींव रखी है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड भारत का पहला राज्य था, जिसने यूसीसी लागू किया था। 26 जनवरी 2026 को उत्तराखंड सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद यूसीसी अधिनियम 2024 में आवश्यक संशोधन करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश 2026 लागू किया।
बता दें कि यूसीसी के तहत उत्तराखंड में अभी तक 100 प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन पूरे किए जा रहे हैं। जोड़े और गवाह कहीं से भी अपने रिकॉर्ड अपलोड करके और वीडियो बयान रिकॉर्ड करके आवेदन कर सकते हैं।
सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़ों के अनुसार 19 जनवरी तक यूसीसी लागू होने के एक साल से भी कम समय में कुल 4,74,447 विवाह पंजीकरण पूरे हो चुके थे। यह पिछले कानून के तहत प्रति दिन सिर्फ 67 पंजीकरण की तुलना में प्रति दिन लगभग 1,400 पंजीकरण का औसत है
हरीश रावत ने अन्य मामलों पर धामी सरकार को घेरा है। हरीश रावत ने हाल ही में बदरीनाथ-केदारनाथ विवाद पर भी टिप्पणी की, जहां गैर-हिंदुओं को मंदिरों में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है। हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते कहा कि सरकार के पास महत्वपूर्ण मुद्दों के जवाब नहीं हैं।
हरीश रावत ने कहा कि बीजेपी के पास बात करने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है। सरकार के पास उत्तराखंड में बढ़ते पलायन और महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति जैसे मुद्दों पर कोई जवाब नहीं है, इसीलिए वे प्रतिबंधों और ऐसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।



