
2026 चारधाम यात्रा के लिए लागू की गई नई व्यवस्थाएं
यसीएडीए ने हेलीकॉप्टर सेवाओं में भी किए बड़े बदलाव
उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं में 30 प्रतिशत की कटौती
प्रतिदिन 65 उड़ानें से घटाकर 40 की गई
दून के सहस्रधारा और सिरसी हेलीपैड पर वायु यातायात नियंत्रण इकाई तथा मौसम विज्ञान इकाई स्थापित की गई
सहस्रधारा से केदारनाथ तक 30 से अधिक पैन-टिल्ट-जूम कैमरे स्थापित किए गए
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी 2026 चारधाम यात्रा की योजना बननी शुरू हो चुकी है। इस वर्ष की यात्रा पूर्ववर्ती यात्राओं से कई पहलुओं में भिन्न होगी, विशेष रूप से हेलीकॉप्टर सुविधाओं के संदर्भ में। इस बार यात्रियों को हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए पहले जैसी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।
वास्तव में, 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान पांच हेलीकॉप्टर हादसे हुए थे, जिनमें कई व्यक्तियों की जान गई थी। इन घटनाओं के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने तुरंत कार्रवाई की। डीजीसीए ने हेलीकॉप्टर संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया और सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी प्रणालियों के पूर्ण अनुपालन तक प्रतिबंध लागू रखा।
इसके विपरीत, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) अब डीजीसीए के सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के बाद ही 2026 चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं को पुनः शुरू करेगा। इस संबंध में यूसीएडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आईएएस आशीष चौहान ने विस्तृत जानकारी दी। यूसीएडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि डीजीसीए द्वारा जारी दिशानिर्देशों का उत्तराखंड नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने पूरी तरह से अनुपालन किया है। इसके परिणामस्वरूप डीजीसीए ने राज्य में सेवाओं की बहाली के लिए संतोष व्यक्त किया है।
उन्होंने जानकारी दी कि शीघ्र ही 2026 चारधाम यात्रा की हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए निविदाएं आवंटित की जाएंगी। इसी आधार पर यूसीएडीए अगले यात्रा काल की तैयारियां कर रहा है। डीजीसीए के निर्देशों के अनुसार, देहरादून के सहस्रधारा और सिरसी हेलीपैड पर वायु यातायात नियंत्रण इकाई तथा मौसम विज्ञान इकाई स्थापित की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, लिनचोली, भीमबली और गौरीकुंड में जमीनी निगरानी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही, सहस्रधारा से केदारनाथ तक 30 से अधिक पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो राज्य में हेलीकॉप्टर सेवाओं को अधिक सुरक्षित और कुशल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। पूर्ववर्ती वर्षों के हादसों से सीख लेते हुए डीजीसीए ने राज्य में हेलीकॉप्टर संचालन पर प्रतिबंध लगाया था। साथ ही, केदार घाटी तथा सहस्रधारा से चार्टर उड़ानों में कमी के आदेश दिए थे।
डीजीसीए के निर्देशों का पालन करते हुए इस वर्ष चारधाम यात्रा में सहस्रधारा हेलीपैड से संचालित होने वाली उड़ानों की संख्या घटाई गई है। पहले यहां से प्रतिदिन 65 उड़ानें होती थीं, जिन्हें घटाकर 40 कर दिया गया है। इसके अलावा, केदार घाटी में शटल सेवाओं में भी 30 प्रतिशत की कमी की गई है। यूसीएडीए के सीईओ ने कहा कि इस बार हेलीकॉप्टर सेवाओं में कई अतिरिक्त सुविधाएं शामिल की गई हैं, फिर भी प्रयास किया जाएगा कि किराए पर नियंत्रण रखा जाए, अर्थात् मूल्य वृद्धि नहीं होगी।
डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप जब हेलीकॉप्टर सेवाओं में 30 से 40 प्रतिशत की कमी होगी, तो इसका प्रभाव सड़क मार्गों पर पड़ेगा। चारधाम यात्रा मार्गों की योजना के बारे में लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे ने बताया कि केदारनाथ के लिए दोहरी लेन सड़क का प्रस्ताव है, जिसका बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। वहीं, सोनप्रयाग और सीतापुर के निकट का भाग अभी शेष है, जहां दोनों ओर से भारी निर्माण के कारण कार्य में कठिनाई आ रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए एक वैकल्पिक पथ की योजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नदी के दूसरी ओर एक सड़क की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, अगले तीन से चार वर्षों में केदारनाथ रोपवे का कार्य आरंभ हो जाएगा, जिससे हेलीकॉप्टर सेवाओं पर निर्भरता कम हो जाएगी।



