उत्तराखंड

ऋषिकेश में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई से खौफ

खाली भूमि को चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें अभी पैनिक होने की जरूरत नहीं है। 5 जनवरी को मामले में दूसरी सुनवाई होनी है।

विरोध में रेलवे ट्रैक पर बैठे सैकड़ों लोग
वन विभाग की कार्रवाई से भयभीत लोगों ने की बैठक
मनसा देवी रेलवे फाटक के पास ट्रैक पर जमे लोग
ऋषिकेश। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश के आसपास के इलाकों में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई को लेकर लोग काफी आशंकित और खौफ में हैं। लिहाजा, लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में सैकड़ों लोग सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं। जिससे मामला गरमा गया है। उधर, शिवाजी नगर में बैठक आहूत की गई। जिसमें पार्षद सुरेंद्र सिंह नेगी, अभिनव सिंह मलिक के नेतृत्व में कई लोग शामिल हुए। बैठक में लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई को लेकर अपने-अपने विचार रखे।
दरअसल, वन विभाग की कब्जे वाली भूमि हाथ से जाते देख लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। आक्रोशित लोगों ने सड़क तो छोड़ अब रेल मार्ग को भी जाम करना शुरू कर दिया है। मनसा देवी रेलवे फाटक पर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित होकर ट्रैक पर बैठ गए हैं, जिसमें महिलाएं सबसे ज्यादा शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जान जाए पर भूमि हाथ से न जाए।
लोगों ने प्रदर्शन करते हुए वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया है। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है, जो लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं है। स्थिति गंभीर बनी हुई है। लोग अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
इस वजह से कोच्चिवली से आने वाली और योग नगरी स्टेशन से जाने वाली गंगानगर एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे से ट्रैक पर रुकी हुई है। जिससे मुसाफिरों को फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। इन दोनों ट्रेन की वजह से अन्य ट्रेनों के संचालक पर भी असर पड़ता हुआ नजर आ रहा है।
बता दें कि एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की खाली पड़ी भूमि का सर्वे कर उन्हें कब्जे में लेने के आदेश वन विभाग और जिला कलेक्टर को जारी किए हैं। इसी कड़ी में वन विभाग की कार्रवाई खाली पड़ी वन भूमि पर चल रही है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं।
पार्षद अभिनव सिंह मलिक यह कार्रवाई सर्वाेच न्यायालय के आदेश पर हो रहा है। खाली भूमि को चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें अभी पैनिक होने की जरूरत नहीं है। 5 जनवरी को मामले में दूसरी सुनवाई होनी है। जिसका सभी को इंतजार है। बैठक में निर्णय लिया गया कि जरूरत पड़ने पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष भी रखेगा।

मुख्यमंत्री और वन मंत्री को जन संवाद के लिए किया जाएगा आमंत्रित
इसके अलावा जल्द ही एक विशाल जनसभा आयोजित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल को जन संवाद के लिए आमंत्रित किया जाएगा। फिलहाल, लोगों ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल विशेष सत्र बुलाकर वन भूमि पर काबिज क्षेत्र को विशेष कानून के तहत हक देने की मांग की है।

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