उत्तराखंडदेहरादून

एसआईआर के बाद मुस्लिम बहुल सीटों पर बदले समीकरण

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी मतदाता सूची में हुए बदलाव ने प्रदेश के चुनावी गणित को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

नफा या नुकसान के आंकलन में जुटी सियासी पार्टियां
4 जिलों में 7 लाख से ज्यादा आया वोटरों का अंतर
धर्मपुर, काशीपुर और हल्द्वानी जैसी सीटों पर यह अंतर विशेष रूप से बड़ा

देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी मतदाता सूची ने प्रदेश के चुनावी गणित में बड़ा बदलाव किया है। अब आकलन उन सीटों पर हो रहा है, जो मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि विपक्षी दल, चुनाव आयोग पर मुस्लिम वोटर्स के नाम हटाने को लेकर ही आरोप लगाता रहा है। मैदानी जिलों में मुस्लिम बहुल सीटों पर 2022 की तुलना में काफी बदलाव देखा गया है। शायद यही कारण है कि खासकर इन सीटों पर नफा नुकसान के आकलन में राजनीतिक दल जुटे हुए हैं।
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी मतदाता सूची में हुए बदलाव ने प्रदेश के चुनावी गणित को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। खास तौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में आए बदलाव पर नजर है, जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से मुस्लिम बहुल या मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाली सीटों के रूप में देखा जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव के समय दर्ज मतदाताओं की संख्या की तुलना 2026 की एसआईआर के बाद की मतदाता सूची से करने पर इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है।
देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चारों जिलों में कुल मतदाताओं की संख्या 2022 के मुकाबले कम हुई है। इन जिलों की कुछ विधानसभा सीटों पर भी मतदाता संख्या में 40 हजार से अधिक तक का अंतर दिखाई देता है। धर्मपुर, काशीपुर और हल्द्वानी जैसी सीटों पर यह अंतर विशेष रूप से बड़ा है।
4 जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून में 2022 के 14 लाख 87 हजार 775 मतदाताओं के मुकाबले 2026 की सूची में 11 लाख 90 हजार 805 मतदाता दर्ज हैं। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 2 लाख 96 हजार 970 का अंतर है। हरिद्वार में 2022 के 14 लाख 20 हजार 182 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 12 लाख 46 हजार 219 मतदाता हैं। यहां अंतर 1 लाख 73 हजार 963 का है। उधम सिंह नगर में 2022 के 13 लाख 3 हजार 476 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 11 लाख 55 हजार 672 मतदाता दर्ज हैं। यहां 1 लाख 47 हजार 804 का अंतर दिखाई देता है। नैनीताल जिले में 2022 के 7 लाख 75 हजार 899 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 6 लाख 93 हजार 325 मतदाता हैं। दोनों के बीच 82 हजार 574 का अंतर है।
चारों जिलों को मिलाकर 2022 में कुल 49 लाख 87 हजार 332 मतदाता थे, जबकि 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 42 लाख 86 हजार 21 है। इस तरह दोनों वर्षों की कुल मतदाता संख्या में 7 लाख 1 हजार 311 का अंतर है।

धर्मपुर में सबसे बड़ा अंतर
विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून जिले की धर्मपुर सीट में सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है। 2022 में यहां 2 लाख 6 हजार 737 मतदाता दर्ज थे, जबकि 2026 की सूची में 1 लाख 46 हजार 861 मतदाता बताए गए हैं। दोनों के बीच 59 हजार 876 का अंतर है। विकासनगर में 2022 के 1 लाख 7 हजार 308 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 99 हजार 916 मतदाता हैं। यहां 7 हजार 392 का अंतर है। सहसपुर में 2022 के 1 लाख 71 हजार 762 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 61 हजार 174 मतदाता दर्ज हैं। इस तरह सहसपुर में 10 हजार 588 का अंतर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि देहरादून जिले की इन तीन विधानसभा सीटों में मतदाता संख्या काफी ज्यादा बदली है।

हरिद्वार की सीटों पर भी बदली संख्या
हरिद्वार जिले की कई विधानसभा सीटें मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव और स्थानीय सामाजिक समीकरणों के लिहाज से राजनीतिक चर्चा में रहती है। भगवानपुर में 2022 के 1 लाख 23 हजार 476 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 17 हजार 44 मतदाता दर्ज है। यहां 6 हजार 432 का अंतर है। पिरान कलियर में 2022 के 1 लाख 27 हजार 118 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 1 लाख 16 हजार 187 मतदाता हैं। अंतर 10 हजार 931 का है। खानपुर में 2022 के 1 लाख 47 हजार 459 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 35 हजार 441 मतदाता हैं, यानी 12 हजार 18 का अंतर है। मंगलौर में 2022 के 1 लाख 15 हजार 978 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 1 लाख 7 हजार 424 मतदाता दर्ज हैं। यहां 8 हजार 554 का अंतर है। झबरेड़ा में 2022 के 1 लाख 21हजार 491 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 14 हजार 15 मतदाता हैं, यानी 7 हजार 476 का अंतर है। इन आंकड़ों से हरिद्वार जिले की इन सीटों पर दोनों सालों की मतदाता संख्या में अंतर सामने आता है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अंतर का पूरा हिस्सा एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों का है या किसी एक समुदाय के मतदाताओं से जुड़ा है।

काशीपुर और जसपुर में भी बड़ा अंतर
उधम सिंह नगर जिले की काशीपुर विधानसभा में 2022 के 1 लाख 76 हजार 740 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 1 लाख 34 हजार 989 मतदाता बताए गए हैं। दोनों के बीच 41 हजार 751 का अंतर है। जसपुर में 2022 के 1 लाख 32 हजार 654 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 17 हजार 401 मतदाता हैं, यानी 15 हजार 253 का अंतर है। नैनीताल जिले की हल्द्वानी सीट में 2022 के 1 लाख 51 हजार 396 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 1 लाख 19 हजार 332 मतदाता दर्ज है। यहां 32 हजार 64 का अंतर है। रामनगर में 2022 के 1 लाख 21 हजार 868 मतदाताओं की तुलना में 2026 में 1 लाख 10 हजार 837 मतदाता हैं, यानी 11 हजार 31 का अंतर दर्ज किया गया है। कालाढूंगी में 2022 के 1 लाख 71 हजार 639 मतदाताओं के मुकाबले 2026 में 1 लाख 62 हजार 882 मतदाता हैं। यहां 8 हजार 757 का अंतर दिखाई देता है।

चुनावी समीकरण पर क्या होगा असर?
इन विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता संख्या का बदलना राजनीतिक दलों के लिए विश्लेषण का विषय हो सकता है। चुनाव में जीत-हार पर असर केवल कुल मतदाताओं की संख्या से तय नहीं होता, बल्कि मतदान प्रतिशत, नए मतदाताओं के पंजीकरण, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और विभिन्न सामाजिक समूहों के मतदान व्यवहार जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। इन सीटों को मुस्लिम बहुल या मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाली सीटें कहे जाने के बावजूद, उपलब्ध कुल मतदाता आंकड़े यह नहीं बताते कि कितने मुस्लिम मतदाताओं के नाम सूची से हटे या जुड़े हैं। इसी तरह 2022 और 2026 की संख्या के बीच का अंतर अपने आप में एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों सालों के बीच नए पंजीकरण, मृत्यु, स्थानांतरण और अन्य कारणों से भी मतदाता संख्या में बदलाव भी हुआ है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों से यही सामने आता है कि चुनी गई विधानसभा सीटों और चार जिलों में 2022 की तुलना में 2026 की मतदाता संख्या कम हुई है। जाहिर है कि कांग्रेस शुरू से ही मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर आशंकित रही है। साथ ही कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं वाले क्षेत्र से भी वोटर के नाम काटे जाने के आरोप लगाती रही है। ऐसे में मुस्लिम बहुल सीटों से काफी संख्या में नाम काटे जाने के बाद कांग्रेस लगातार भाजपा को निशाने पर ले रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button